माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नाम खुला पत्र
माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, आप भारतीय जनमानस की आशा एवं आकांक्षा की प्रतिमूर्ति हैं। दशकों बाद, इस देश को एक ऐसा नेतृत्व मिला है, जो भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने में सक्षम है। आज से ठीक 3 वर्ष पहले जब देश की जनता ने, सशक्त राष्ट्र के निर्माण हेतु एक मजबूत सरकार की नीव रखी थी, तो लोगों की आपसे कई उम्मीदे थी। कुछ सपने पूरे हुए, तो बहुत कुछ बाकी है। आज देश में, आंतरिक एवं बाह्य समस्याओं से जूझते हुए आगे बढ़ रहा है। कुछ समस्याएं ऐसी हैं, जिसपर हमारा आपका कोई नियंत्रण नहीं है, लेकिन कुछ समस्याएं ऐसी जरूर है, जिसे मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति से खत्म किया जा सकता है। आज मैं एक ऐसी ही समस्या के बारे में आपसे चर्चा करना चाहूंगा। 1. हमारा संविधान समता के सिद्धांत पर आधारित है, यह कहती है कि जाति, धर्म, भाषा, लिंग और क्षेत्र के आधार पर किसी के साथ कोई विभेद नहीं किया जाएगा, फिर भी आजादी के 70 वर्ष बाद भी आरक्षण क्यों? 2. आरक्षण भारतीय संविधान के मूल भावनाओं के खिलाफ है, यह संविधान के समतामूलक सिद्धांतों पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह है। क्या आप बताएंगे कि दलित, शोषित एवं...